घर का नक्शा बना विवाद की वजह तो मिली बड़ी राहत! जिला पंचायत से पास मकानों को वैध करने का रास्ता साफ, शुल्क में भारी छूट

लखनऊ: जिला पंचायत से नक्शा स्वीकृत कराकर मकान बनाने वाले हजारों भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिली है। विकास प्राधिकरणों और जिला पंचायतों के अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने ऐसे भवनों के नियमितीकरण की प्रक्रिया तय कर दी है। इसके साथ ही भवन मालिकों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में भी बड़ी छूट देने का फैसला किया गया है।

गुरुवार को जारी आदेश के अनुसार, विकास प्राधिकरण की सीमा में आने वाले उन भवनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत वैध किया जाएगा, जिनके नक्शे पहले जिला पंचायतों से स्वीकृत हुए थे और जिनका निर्माण पूरा हो चुका है या निर्माण कार्य जारी है। इससे नोटिस और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाइयों से जूझ रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

प्रमुख सचिव ने जारी किए स्पष्ट दिशा-निर्देश

आवास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी आदेश में ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की गई है। शासन का मानना है कि विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों से स्वीकृत नक्शों को लेकर लगातार विवाद पैदा हो रहे थे, जिन्हें अब स्पष्ट नियमों के जरिए समाप्त किया जाएगा।

1 अप्रैल 2026 तक स्वीकृत नक्शों को मिलेगा लाभ

नई व्यवस्था के तहत जिला पंचायतों द्वारा 1 अप्रैल 2026 तक स्वीकृत सभी नक्शों और उनके आधार पर बने या निर्माणाधीन भवनों को नियमितीकरण का लाभ दिया जाएगा। विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 12 माह के भीतर ऐसे सभी मामलों का निस्तारण करें।

साथ ही जिला पंचायतों को भी आदेश दिया गया है कि वे 1 अप्रैल 2026 तक स्वीकृत सभी नक्शों की प्रमाणित सूची 15 दिनों के भीतर शासन और संबंधित विकास प्राधिकरणों को उपलब्ध कराएं, ताकि बाद में किसी तरह की अनियमितता या बैक डेटिंग की संभावना न रहे।

भवन मालिकों को कैसे मिलेगा फायदा

यदि कोई निर्माण विकास प्राधिकरण की महायोजना के अनुरूप है और जिला पंचायत से स्वीकृत नक्शे के आधार पर किया गया है, तो उसे वैध माना जाएगा। इसके लिए जिला पंचायत द्वारा स्वीकृत नक्शे का पूरा विवरण विकास प्राधिकरण को उपलब्ध कराया जाएगा।

वहीं यदि निर्माण महायोजना के अनुरूप है लेकिन भू-उपयोग परिवर्तन की आवश्यकता है, तो विकास प्राधिकरण संबंधित प्रक्रिया पूरी कर भवन का नियमितीकरण करेगा। ऐसे मामलों में निर्धारित समय के भीतर आवेदन करने पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत तक की छूट भी मिलेगी।

200 वर्गमीटर तक के मकानों को सबसे बड़ी राहत

शासनादेश में आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए 200 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर बने आवासीय भवनों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। यानी ऐसे मकान मालिकों को नियमितीकरण के लिए किसी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा।

कुछ निर्माणों को नहीं मिलेगी वैधता

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जलाशयों, तालाबों, सरकारी भूमि और महायोजना में आरक्षित जल निकायों पर किए गए निर्माणों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा पार्क और खुले क्षेत्र के आरक्षण से जुड़े मामलों की विशेष जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।

यदि किसी व्यक्ति ने हरित क्षेत्र पर निर्माण कराया है, तो उसे दूसरी जगह उतनी ही भूमि हरित क्षेत्र के रूप में छोड़नी होगी। इसके बाद ही संबंधित मामले पर विचार किया जाएगा।

हजारों मकान मालिकों को मिलेगा लाभ

सरकार के इस फैसले से विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायत से स्वीकृत नक्शों के आधार पर बने हजारों मकानों के मालिकों को राहत मिलने की संभावना है। वर्षों से चल रहे नोटिस, ध्वस्तीकरण और भवनों की वैधता से जुड़े विवादों का समाधान आसान होगा। साथ ही विकास प्राधिकरणों और जिला पंचायतों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।

 

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